भूख मर्यो

बालपणा रो नाम भीखा मारू हो पण आखा गॉंव का साथीड़ा वांके नाम को सरलीकरण करता -करता वींको उपनाम भूखमर्यो राक्यो । वसान अक्कल का माइक्रोस्कोप उं देखां तो भूखमर्या में भी मंग्तापणा का कतराई त्र्या का वाइरस फूल गोबी में लट्टा के न्यान साफ-साफ दिख जाता हा ।
दसवीं क्लास में पॉंचवी दान फेल वेताईन बनाई खास अनुभव के वणी भले आदमी धान-चून की दूकान खोल काड़ी। एक दन बूणी बट्टा की टेम पे एक ग्राक वींकी दूकान पे आयो । ग्राक ,ज्वार ,बाजरा, मक्की, चाय-पत्ती असा चार -पॉंच आईटम मोलाया । वो भी नामी भूलक्कड़ भई हो जो थेलो घरै भूल्यायो ।
भूखमर्यो हगराई होदा-पादा प्लास्टिक की थेल्यां में भर-भर ने टरकाबो छार्यो हो पण ग्राक यूं केर्योे के मने यो हारोई सामान कोई ढंगढांग का थेला में देदो ताकि हाड़ा तीन सो रूप्या को सामान घरे सही सलामत परो जावे । वीं न्यारा थेला की किम्मत कोई दस रूप्या ही। सेठजी ने दस रूप्या के घाटा को अंदाजो लाग्ता हीं वांका करम पे हेक्या थका पापड़ के न्यान नराई हळ छड़ग्या ।
दोया के बच में माथा-फोड़ी ज्यादा तेज न व्हे जावे ईं बात को ध्यान
राकता थका ग्राक क्यों देखो सेठजी आज हवेर पेली थां भी घणा छीज ग्या अबे नेम छीजो मती । था असी करो होदा का , थेला का अन थांके छीजबा का तीनां का रूप्या न्यारा-न्यारा लिख अन नीचे रूप्या की कुल जोड़ लगादो । म्हारे भी घरे पाम्णा बाट नाळर्या ।
भूखमर्यो सेठ मन-मन में घणो राजी व्यो , दुकान खोल्या केड़े आज आकाई मीना में पेली दान आज कोई असो दिलदार ग्राक आयो जो मने या वात केर्यो के थाके छीजबा का पैसा भी म्हारा होदा-पादा का बिल में

जोड़दो अन मने झट उं झट फ्री करो। अबे भूखमर्या को हारोई दिमाक खूद के छीजबा को मुआवजो तै करबा में लाग ग्यो । धीरे पू बोल्यो हाड़ा तीन सो रूप्या तो सामान का दस रूप्या थेला का अन साठ रूप्या म्हारे छीजबा का । धापीन चार सो बीसी हमेत चार सो बीस रूप्या को पक्को बिल पकड़ा काड्यो ।
बिल देक ग्राक केवा लाग्यो सब ठीक हे सेठजी पण था छीजबा का साठ


रूप्या खूब ज्यादा जोड़ काड्या । दोया के बच मंे तनातनी बढ़बा लागी । सेठजी छीजता-छीजता छीजबा का पैसा कम करता जार्या । कम करता-करता तीस रूप्या पे आन अंगद के पॉंव के न्यान ठाम का ठाम अड़ग्या । चाल्तो गेलो हो दस-बीस मनक पगई भेळा वेग्या ।
मनक उबा-उबा सतनाराण भगवान की कथा के न्यान आनंद लेबा लाग ग्या । घबरान ग्राक क्यो , मारे तो यो सामान छावै कोने मूं दूजी दूकान पे जार्यूं । ग्र्राक नीचे उतर्यो तो सेठजी भी छीजबा का पैसा ओर नीचे उतर्या । कम करता-करता बोल्या लोेजी छीजबा का अब पॉंच रूप्याईज राक्या । यो सीन देक-देक मनक जो आर्या जोई दांत काड़ता आयर्या अन वटै भीड़ में मलता जार्या । भूखमर्यो यो होचर्यो के मनक ईं बास्ते दॉंत काड़र्या के में भूल-चूक छीजबा का पैसा हेला बता काड्या ।
ग्राक थोड़ोक आगे जा-जा अन पाचो आवे अन सेठजी चार -चार आना कम करता जावे , घबरायो थको लास्ट मेें हो खान मनका की भीड़ में सेठजी बोल्या देकोजी छीजबा का अब चाराना राक्या, सब पैसा कम कर नाक्या । अगर चारानाई मने ईंमें नी मले तो पचे मंे मनक जमारा में आन आज अतरो छीज ने कै जग मार्यो ।


अड़े-भड़े उबा हगराई मनक खूब दांत काड्या । ग्राक भी मन-मन में तो हॅंसर्यो पण दिकाबा के वास्ते यूंई गंभीर मुद्रा बणा मली ही । बना पैसा के असो शानदार खेल-तमाशो चालर्यो हो कुण छोड़े । मनक हॅंस-हॅंस थाक ग्या । जतरे एक दानो-गड़ो डोकरो जीने आकाई गांव का मनक चतराबा केता हा ।
चतराबा वीं सवाल ने देकताई पेली हमझग्या । वे बोल्या देको रे भई ईं
झगड़ा ने मूं पगई मेटदूं । हिंग लागे न फिटकरी रंग चोखो आबा की पक्की गारंटी । म्हारी भी एक षर्त हे मूं ईं फाट्या में कां टांग फसाउं । ईं काम ने जद करूं जद मने एक-एक रूप्यो दोई आडीनूं मले । काओ भई दानकी कींके नी छावे ।
घण्टा खा नू बातां का आंकड़्या में दोयां की गेंट्यां फसथकी ही । दोई कदकाई अबका वेर्या हा । दोई जणा देक्यो ओ बाळ परो एक रूप्या में कसी माया जारी दोई जणा पगईं त्यार वेग्या । हां भरताई चतराबा ने एक-एक रूप्यो काड-काड ने दे काड्यो । अबे बासा नके दो अदेल्या अन चार पावल्या भेळी वेगी ।
पचे चतराबा रिचार्ज व्या थका मोबाईल के न्यान बोल्या देकोरे सब मनकां दोई पार्टियां मने म्हारी दानकी दे काड़ी । फैंसलो यूं हे कि सब जणा देकजो मूं ग्राक को रूप्यों ग्राक ने पाचो देर्यंू ,खट वाने दो अदेल्या पाची देदी । अबे बासा नके चार चाराण्या वंची । वां कै कीदो ग्राक ने एक पावली ओर दे’दी । ग्राक कनू रूप्यो आयो अन हवा रूप्यो वांका नके पाचो परो ग्यो ।


बच्या थका बाराना , बासा वांकी बंडी की मैली जेब में मेल काड्या । भूखमर्या सेठ ने केवे देक रे भई आज दन तक ईं दुनिया में कसा भी सेठ ने माल बेचबा में छीजबा का नाम की एक पै नी मली । अणी वास्ते आज थने भी नी मल सके । ध्यान लगान हुणजो रे मनका जीं दन उं ये दुकानदार्या चाली जदी उं छीजबा को मुनाफो ग्राक ने ओर सेठां ने हंसबा को मुनाफो मलतो आयो । बुड़ा बासा दांत काड़ता जार्या अन फैंसलो हुणाता जार्या ।
भूखमर्यो सेठ मन में होचबा लागो यार आज तो गल्त्यां पे गल्त्यां वेगी । तीर हामे वाळा पे चलायो पण यो तो मुड़-मुड़ान पाचो चलाबा वाळा की‘ज खोपड़ी फाड़ अन मगज में घ ुसग्यो । वीं तीर को असर असो फटाफट व्यो के सेठ धीरे -धीरे मळक-मळक करबा लाग्यो । यो देखताई देकबा वाळा मनका को रंग फेर बदल ग्यो । एक ने छोड़ने सब जणा तो पेल्याई हंसर्या हा एक जणोईज बाकी हो वो भी अबे भीड़ भेळो हॅंसबा लाग ग्यो ।
बुड़ा चतराबा देक्यो सब जणा हूत-हावेल में आग्या अबे या सभा विसर्जित करबा में ई सार हे । बासा आखरीदान बोल्या देकजो रे भायां ग्राक नके रूप्या को हवा रूप्यो परोग्यो अबे बासा जेब मीनू चार आना फेर काड्या सबाका हामे धीरे -धीरे हॅंसबा वाळा वीं भूखमर्या सेठ ने देदीदा ।
अबे बूडा बासा कने दो पावल्या ओर री । वणी मूं भी बंडी की जेब में हाथ घाल अन एक पावली ओर काड़ी । भूखमर्या सेठ ने क्यो देकोजी सेठजी मने था चाराना को गुड़ देदो ।
गुड़ तोलर्या हा वी’दान चतराबा भाव-ताव भी कम करा काड्यो अन छीजता-छीजता थोड़ी-थोड़ी देर में केतार्या थोड़ो ओर नाक , थोड़ो ओर नाक यूं के-के पावली का पीसा में अदेली को गुड़ लेल्दो । पुड़की बांधती टेम कै केवे नीनी ईं गुड़ की एक नी दो पुड़कियां बणाओजी अन दोई बराबर वेणी छावे । ताकड़ी मूं बाट पाचा बाने काड़्या वटीने कागज मेल्यो अन गोर आदो-आदो कीदो । चतराबा के चाराना का पैसा में आठाना को गोर आग्यो। बासा कै कीदो गोर की एक पुड़की तो पाची बण्डी की चारानी वाळी जेब में मेली । तीन चार दान आंग्ळी कर-कर ने चाराना ने मैनूं चेक कर लीदा विष्वास वेग्यो के हॉं चाराना जेब में हे । गोर की एक पुड़की जो बाने वंची थकी ही वींमें कोई धोबो खान गोर होजो वटे उबा थका हगराई जणाने वांट काड़्यो ।
हाराई मनक गोर खाता जार्या अन दांत काड़ता जार्या । कोई केर्या ध्यान उं खाजे यो छीजबा को गोर हे । कोई केर्या न न आरामूं खाओ यो तो हंसबा को गोर हे । कोई केता जार्या ऐ रे आपी एकला नी खावा घरे भी लेजावां । आकाई हेर्या में बाटांगा ।
सब जणा आप-आपणे घरे ग्या । कण-कण करतो गोर आकाई गांव में वंटग्यो ं चतराबा घरे जाताई हेला पाड़ डोकरी ने हेटे बुुलाई । आपणा हाथाउं वांके मूण्डा में गोर की एक मोटी डळी मेली । आपबीती घटना डोकरी मां नामीक कम हुणे जो दो-दो दान हुणाई । डोकरा डोकरी खूब दांत काड़्या ।


जाता थका भाबा ने बासा फेर बण्डी मूं काड़ अन वैज चाराना दीदा क्यो झट जाओ याने आपणी लाखीणी तिजोरी में मेलो । पचे नामेक दरपता-दरपता भाबा का मूंडा का भड़े कट्यो कांद्ड़ो लेग्या । दरप अणी बास्ते र्या हा के मोट्यारपणा में रीस-रीस में भाबा दो चार दान बासा का कांद्ड़ा खाग्या हा, जदकी चतराबा के असी चमक बड़गी आज चार जुग निकळग्या पण वा चमक न निकळी । अस्पताल में दुक्णा पे पटृी करे जसान चतराबा नेम धीरेपू भाबा ने पूच्यो काओसा एक वात वताओसा अबे आपणी तिजोरी मंे लाख रूप्या वेग्या के नी व्यासा तोभी भाबा मंदसौर के ढोल के न्यान बोल्या हाल नी व्या म्हारा अंदाता । घणा रूप्या घटर्या । हाल तो गॉंवा-गॉंवा जान असा कतराई झगड़ा का हुळजारा था करोगा जदी जान वा आदी तिजोरी पूरी भरेगा।

1 टिप्पणी:

किरण राजपुरोहित नितिला ने कहा…

घणी बढ़िया लगी सा आपरी रचना.