मायड़ भाषा






मायड़ भाषा लाड़ली, जन-जन कण्ठा हार ।
लाखां-लाखां मोल हे, गाओ मंगलाचार ।।

वो दन बेगो आवसी ,देय मानता राज ।
पल-पल गास्यां गीतड़ा,दूणा होसी काज ।।


अमृत 'वाणी'

1 टिप्पणी:

Anand ने कहा…

Mahne mahri rajasthani mahre jivta rajasthan re har loga re mundane su suni chahu anand chennai mahro rajasthan