हार्या केड़े देखजो , कठे-कठे ही खोट । कतरा जिगरी कर गया ,हरता-फरता चोट ।। हरता-फरता चोट ,उड़ाग्या मूंडा रा रंग । हाल-चाल बेहाल , कदी न कर ऐसो संग ।। के ’वाणी’ कविराज, जद दारू-पाणी नेड़े । पी-पी के जो जाय , आय कुण हार्या केड़े ।।
जीत गयो र जीत गयो , वोटां वाळी जीत । ढोल-नगाड़ा आज से , गावे थांका गीत ।। गावे थांका गीत , खुशबू वाळी माळा । या तो मनखां जीत ,था मती करिजो छाळा ।। के ’वाणी’ कविराज , जा‘गा बारा के भाव । करगेंट्या के न्यान ,जो बदल दिया थां भाव ।।